Bhanbhori Mandir : हरियाणा में इस गांव में 400 साल से जल रही अखंड ज्योत, कई राज्यों से आते हैं श्रद्धालु

On: May 18, 2026 5:48 PM
Bhanbhori Mandir : हरियाणा में इस गांव में 400 साल से जल रही अखंड ज्योत, कई राज्यों से आते हैं श्रद्धालु

Bhanbhori Mandir : शारदीय नवरात्र (Navratri) के प्रारंभ पर देवभूमि बनभौरी माता भ्रामरी शक्तिपीठ पर कंजक पूजन कर नवरात्र पूजा-अर्चना की शुरूआत की। माता भ्रामरी धाम को लेकर बताया जाता है कि अखंड ज्योत माता की 400 साल से जल रही है। प्रदेश ही नहीं बल्कि देश-विदेश से श्रद्धालु पूजा-अर्चना को आते है।

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यहां पर नवजात शिशु के सिर के सुच्चे बाल उतरवाने, नवविवाहित गठजोड़ा की पूजा करवाने की मान्यता है। कुलदेवी की पूजा के लिए श्रद्धालु पहले नवरात्र की पूर्व संध्या पर ही मंदिर परिसर पहुंचने शुरू हो गए थे। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे सहित अन्य पुख्ता प्रबंध किए गए थे।

सुरक्षा की दृष्टि से पूरे मंदिर परिसर एवं बाहर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए है तो पुलिस प्रशासन के साथ-साथ मंदिर परिसर में सिक्योरिटी गार्ड महिला, पुरूष की ड्यूटी लगाई है ताकि श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना में परेशानी न हो। मंदिर परिसर में महिलाएं माता के भजनों पर झूमी। मंदिर को फूलों के साथ सजाया गया तो यहां पर सेल्फी प्वाइंट भी बनाया गया है।

Bhanbhori Mandir : एक दिन तय करने की बजाए कभी भी माता के दर्शन करने आए श्रद्धालु

जानकारी देते हुए मां भ्रामरी देवी (Bhanbhori Mandir) शक्तिपीठ के संस्थापक सुरेंद्र कौशिक ने बताया कि सभी श्रद्धालुओं से अपील करते है कि जो छठ की मान्यता है ये पुरानी मान्यता है। पहले लोग काफी दूर-दूर से आते थे। जब न तो फोन होते न कोई संदेश दे पाते थे इसलिए समय निकाल कर एक दिन एकत्रित होकर अधिकांश श्रद्धालु माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते थे।

उस समय से ये मान्यता हो गई थी। ऐसा कुछ नहीं है माता के जो नवरात्र है सभी नवरात्र शुभ है किसी भी दिन आकर माता के दर्शन श्रद्धालु कर सकते है कोई एक दिन विशेष तय करके श्रद्धालु न आए। इस बार माता हाथी के सवार होकर आई है जो देश, व्यापार के लिए शुभ संकेत है। श्रद्धालुओं के लिए बस स्टैंड पर पार्किंग व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर में बेरीकेट्स लगाए गए है ताकि लाइन में लग कर दर्शन श्रद्धालु कर सकें।

मंदिर परिसर (Bhanbhori Mandir) में दर्शन के बाद भंडारा में प्रसाद ग्रहण श्रद्धालु कर सकते है। मनोकामना पूर्ति के लिए धागा भी श्रद्धालु बांधते है। मनोकामना पूर्ति के बाद धागा श्रद्धालु खोलते है। नवरात्र में जो व्रत की विधि है कम से कम दो व्रत रखे उनके नियमों पर खरा उतरे। इस मौके पर पुजारी रामनिवास कौशिक, सतबीर कौशिक, शिवकुमार कौशिक, श्याम लाल कौशिक, राजेश कौशिक, नवरत्न कौशिक, पूर्व पार्षद विकास, अमित कापड़ो मौजूद रहे।

 

 

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Neeru Sheokand

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