Defence Export Rules: भारत ने अपने Defence Export Rules सिस्टम को और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा उत्पादन विभाग ने रक्षा उत्पादों के निर्यात से जुड़ी प्रक्रिया और Open General Export Licence (OGEL) व्यवस्था में बदलाव किए हैं। इसका सीधा फायदा भारतीय रक्षा कंपनियों को मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब कई मामलों में पहले की तुलना में कम प्रक्रियाओं से निर्यात का रास्ता खुल सकेगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सरकार का मकसद भारतीय Defence Industry को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाना है। नई व्यवस्था में कंपनियों को विदेशी टेंडर, प्रदर्शनियों और कारोबारी अवसरों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी। हालांकि संवेदनशील देशों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में जरूरी नियंत्रण पहले की तरह लागू रहेंगे।
गैर-घातक रक्षा सामान के निर्यात में राहत
नई व्यवस्था के तहत ज्यादातर देशों में गैर-घातक रक्षा सामान के निर्यात के लिए Stakeholder Consultation की जरूरत नहीं होगी। संवेदनशील देशों के लिए सुरक्षा संबंधी प्रावधान जारी रहेंगे।
इसी तरह अंतरराष्ट्रीय Defence Exhibition और विदेशी टेंडर में उत्पादों को भेजने के मामलों में भी प्रक्रिया को सरल किया गया है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए अपने उत्पादों को वैश्विक खरीदारों के सामने पेश करना आसान हो सकता है।
OGEL में भी हुआ बड़ा बदलाव ( Defence Export Rules )
Open General Export Licence यानी OGEL को भी पहले से ज्यादा सुविधाजनक बनाया गया है। इसके तहत पात्र निर्यातक तय श्रेणी के रक्षा सामान की कई खेपों को एक ही अनुमति व्यवस्था के तहत निर्यात कर सकते हैं, जिससे हर खेप के लिए अलग-अलग मंजूरी लेने की जरूरत कम होती है।

अब पहले से मौजूद तीन अलग OGEL प्रक्रियाओं को मिलाकर एक संयुक्त SOP तैयार किया गया है। इससे कंपनियों के लिए नियमों को समझना और उनका पालन करना आसान होगा।
सबसे अहम बदलावों में OGEL की वैधता अवधि को 2 साल से बढ़ाकर 3 साल करना शामिल है। इससे कंपनियों को बार-बार नवीनीकरण की प्रक्रिया से राहत मिलेगी।
41 देशों की सीमा भी हुई खत्म
OGEL के तहत निर्यात के लिए उपलब्ध देशों का दायरा भी बढ़ाया गया है। पहले जहां यह सुविधा 41 देशों तक सीमित थी, अब इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया है। हालांकि संवेदनशील और प्रतिबंधित देशों तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध या हथियार प्रतिबंध वाले देशों को इससे बाहर रखा गया है।
इसके अलावा जिन भारतीय कंपनियों के विदेशी Original Equipment Manufacturers यानी FOEMs के साथ लंबे समय के समझौते हैं, उनके लिए भी नई सुविधा जोड़ी गई है। निर्धारित शर्तें पूरी होने पर OGEL की अवधि संबंधित समझौते की अवधि के अनुरूप रखी जा सकती है।
MSME कंपनियों को भी मिलेगा फायदा
इन बदलावों से बड़ी कंपनियों के साथ-साथ Defence Sector में काम कर रहे MSMEs को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। कम कागजी प्रक्रिया और तेज मंजूरी के कारण कंपनियां विदेशी बाजार में मिलने वाले अवसरों पर जल्दी निर्णय ले सकेंगी।
सरकार की कोशिश है कि भारत को केवल रक्षा उपकरण बनाने वाला देश नहीं, बल्कि विश्वसनीय Global Defence Manufacturing और Export Hub के रूप में स्थापित किया जाए।
रक्षा क्षेत्र में निर्यात को आसान बनाने की यह पहल ऐसे समय में हुई है जब भारत के Defence Production और Exports दोनों में तेजी आई है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
Source: PIB
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