भारत सऊदी अरब से तेल खरीदता है, और उसका भुगतान डॉलर में करता है। ऐसा क्यों होता है और ये Petrol Dollar System क्या है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सऊदी अरब, UAE और अन्य खाड़ी देशों से जब कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिकी डॉलर का उपयोग क्यों होता है, भारत अपनी करेंसी रुपये का इस्तेमाल कर सकता है, क्योंकि तेल अरब देशों को है।
बड़ी बातें
- डॉलर की जरूरत क्यों होती है।
- PetroL Dollar System क्या है?
- PetroL Dollar System की शुरुआत कब और कैसे हुई?
- डॉलर क्यों चुना गया और करेंसी क्यों नहीं।
- PetroL Dollar System का भारत पर क्या असर पड़ता है?
- भारत रूपये में तेल खरीद सकता है या नहीं।
- क्या होगा अगर PetroL Dollar System कमजोर हुआ तो।
- PetroL Dollar System से अमेरिका को क्या फायदा होता है।
- रुपया भविष्य में मजबूत भूमिका निभा सकता है या नहीं।
- FAQ
डॉलर की जरूरत क्यों होती है।
PetroL Dollar System दुनिया की सबसे ताकतवर आर्थिक व्यवस्था है। यह सिस्टम सिर्फ तेल से नहीं, बल्कि अमेरिकी आर्थिक ताकत, दुनिया की राजनीति और वैश्विक व्यापार से जुड़ा है।
आज हमें इस यह आर्टिकल समझने में सहायताकरेगा किPetroL Dollar System की शुरुआत कैसे हुई और यह सिस्टम क्या है, भारत पर इसका प्रभाव कैसे पड़ता है और आने वाले समय में डॉलर की अहमियत कम होगी या फिर ऐसे ही रहेगी।
PetroL Dollar System क्या है?
इस सिस्टम के अनुसार दुनिया में तेल का व्यापार अमेरिकी डॉलर में होगा। पूरा देश पहले अमेरिकी डॉलर खरीदेगा, फिर तेल खरीदेगा, चाहे कोई भी देश हो। जैसे, जर्मनी को सऊदी अरब से तेल खरीदना है, तो पहले जर्मनी को यूरो (€) देकर अमेरिका से डॉलर खरीदने पड़ेगा।फिर तेल खरीद पाएंगा। यही कारण है डॉलर की मांग लगातार बनी रहती है।
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हमारे देश की राजधानी नई दिल्ली में Petrol की कीमत अब 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है, और Diesel 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है। अब यह देखना है की तेल की कीमत बढ़ने से आम आदमी की जेब पर कितना असर पड़ेगा ?
PetroL Dollar System की शुरुआत कब और कैसे हुई?
1970 के तेल संकट के कारण, दशक 1970 में दुनिया में बड़ा तेल संकट आया था, उस समय अमेरिका ने डॉलर को दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी बनाने का सोचा और इस तेल व्यापार से जोड़ा दिया।

अमेरिका और सऊदी अरब में 1974 में एक समझौता हुआ, समझौते के अनुसार सऊदी अरब के द्वारा तेल सिर्फ अमेरिकी डॉलर में बेचा। अमेरिका सऊदी अरब को इसके बदले में सुरक्षा देगा, अमेरिका राजनीतिक और आर्थिक सहायता भी करेगा। इसके बाद दूसरे देशों ने भी डॉलर में तेल बेचने शुरू कर दिया।
यहीं से पेट्रोल डॉलर सिस्टम शुरू हुआ।
डॉलर क्यों चुना गया और करेंसी क्यों नहीं।
मजबूत अमेरिकी अर्थव्यवस्था बाकी देशों को डॉलर पर विश्वास था, क्योंकि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी, उस समय में।
डॉलर की स्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थिर करेंसी बहुत सहयोगी होती है। बाकी करेंसी से डॉलर ज्यादा स्थिर माना जाता था।
वैश्विक बैंकिंग नेटवर्क डॉलर में लेन-देन आसान है, क्योंकि अमेरिका का बैंकिंग सिस्टम पूरी दुनिया भर में था
तेल की ज्यादा मांग,तेल व्यापार जो डॉलर को पहले से मजबूत बना चुका था, क्योंकि दुनिया की हर अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर थी।
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Central Employees के लिए अच्छी खबर है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उनके महंगाई भत्ते में 2 प्रतिशत की वृद्धि की है, जिससे यह 58 % से बढ़कर 60% हो गया है। इससे एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ होगा। पेंशनर्स को महंगाई राहत मिलती है।
PetroL Dollar System का भारत पर क्या असर पड़ता है?
दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशो में भारत भी शामिल है, भारत 85% कच्चा तेल सऊदी अरब जैसे देशों से खरीदता है। भारत की अर्थव्यवस्था पर डॉलर का सीधा असर पड़ने का यही कारण है।
रुपये पर दबाव बढ़ता, अगर भारत ज्यादा तेल खरीदेगा, तो उस ज्यादा डॉलर की जरूरत होगी, इससे रुपया कमजोर हो सकता है और
डॉलर की मांग ज्यादा होगी। भारत को तेल खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे। अगर डॉलर 80 रुपये से बढ़कर 85 रुपये हो जाए
डीजल और पेट्रोल महंगे हो जाएंगे। भारत में पेट्रोल डीजल महंगा तब होता है, जब डॉलर मजबूत होता है और तेल महंगा होता है। इसका प्रभाव आम आदमी पर ज्यादा होता है।
महंगाई बढ़ती है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाएगा, अगर तेल महंगा हो गया तो, साबुन और खाने-पीने की कीमतें भी
बढ़ेंगी, पेट्रो-डॉलर सिस्टम का असर सीधा हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर होता है।
भारत रूपये में तेल खरीद सकता है या नहीं।
भारत ने कई देशों के साथ रुपये में व्यापार बढ़ाने की कोशिश पिछले कुछ सालों से कर रहा है। रूस के साथ रुपये में व्यापार करना शुरू किया, भारत ने रूस से काफी मात्रा में तेल खरीदा, रूस-यूक्रेन के बाद। इससे कीमत और रुपये में भी थोड़ा लेन-देन हुआ। आसान नहीं है, पूरी तरह रुपये में व्यापार करना। फिर भी इससे भारत की डॉलर पर निर्भरता कम हो गई। दुनिया भी पूरी तरह पेट्रोल डॉलर आधारित सिस्टम पर चलती है। ऐसा क्यों होता है,

अंतरराष्ट्रीय विश्वास
डॉलर की लिक्विडिटी
बैंकिंग सिस्टम विश्व के अंदर
अमेरिका की आर्थिक और राजनीतिक ताकत,
डॉलर को तुरंत हटाना आसान नहीं है।
BRICS देशों की योजना
BRICS देश जैसे भारत, चीन, ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका डॉलर के विकल्प पर चर्चा की है। परंतु अभी तक कोई बड़ा फर्क देखने को
नहीं मिला।
क्या होगा अगर PetroL Dollar System कमजोर हुआ तो।
अमेरिका की आर्थिक ताकत पर प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि आने वाले समय में तेल व्यापार डॉलर की बजाय अन्य करेंसी में होने लगा तो। बदलाव संभावित जैसे हैं, कि विश्व में डॉलर की मांग घट सकती है, अमेरिका की स्थिति कमजोर हो सकती है, अंतरराष्ट्रीय व्यापार का संतुलन बदल जाएगा, कोई और करेंसी मजबूत हो सकती है, बदलाव होगा परंतु धीरे-धीरे होगा।
PetroL Dollar System से अमेरिका को क्या फायदा होता है।
डॉलर की मांग लगातार होना, डॉलर की डिमांड हमेशा बनी रहती है। इसका कारण तेल खरीदने के लिए
डॉलर की जरूरत, जो हर देश को होती।
आसानी से कर्ज ले सकता है, अमेरिका अमेरिका आसानी से बॉन्ड बेचकर पैसा इकट्ठा कर सकता है क्योंकि दुनिया डॉलर इस्तेमाल करती है।
आर्थिक मजबूती, अमेरिका का वैश्विक प्रभाव ज्यादा है, डॉलर के मजबूत होने के कारण। इसलिए अमेरिका के फैसले दुनिया पर प्रभाव डालते हैं।
रुपया भविष्य में मजबूत भूमिका निभा सकता है या नहीं।
भारत धीरे-धीरे कोशिश कर रहा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रुपये का इस्तेमाल बढ़ सके। इसके लिए भारत ने कई देशों के साथ local currency trade की बात की है। अंतरराष्ट्रीय भुगतान सिस्टम में रूपये का उपयोग बढ़ रहा है।
Source: indiatv
FAQ
Que.-1
क्या है PetroL Dollar System?
ऐसा सिस्टम है जिसमें दुनिया में तेल
का व्यापार अमेरिकी डॉलर में किया
जाता है।
Que.-2
भारत डॉलर में तेल क्यों खरीदता है?
क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग
सभी देश तेल डॉलर में बेचते हैं।
Que.-3
पेट्रो – डॉलर सिस्टम की शुरुआत?
यह 1970 में अमेरिका और सऊदी अरब के
समझौते के बाद हुई थी।










