HPPCL के पूर्व मुख्य अभियंता Vimal Negi की मौत मामले में भाजपा ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हिमाचल प्रदेश में एक बहुत बड़ा मामला सामने आया है। यह मामला HPPCL के पूर्व मुख्य अभियंता Vimal Negi की मौत से जुड़ा हुआ है। भाजपा के प्रदेश महासचिव Sanjeev Katwal ने इस मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आना बहुत ही ज्यादा जरूरी है और यदि जांच में किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी या पद का दुरुपयोग सामने आता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
Sanjeev Katwal ने यह आरोप लगाया कि जांच के दौरान कुछ जानकारियां सामने आई हैं जो प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी परियोजना से जुड़े दस्तावेजों में वास्तविक स्थिति और आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच यदि अंतर पाया जाता है, तो यह एक बहुत चिंताजनक विषय है।
उन्होंने यह कहा है कि यह मामला केवल एक अधिकारी की मौत का नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थाओं में निर्णय लेने की प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है। लोग जानना चाहते हैं कि यदि अनियमितताएं हुई हैं तो उनके लिए कौन जिम्मेदार है और समय रहते ही कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
Vimal Negi मार्च 2025 में अचानक से लापता हो गए थे और कुछ दिनों बाद उनका शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। इस घटना को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से बहुत से कई सवाल उठाए गए हैं और अब निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज से हो रही है।
Sanjeev Katwal ने कहा कि यदि किसी अधिकारी पर दबाव डालकर कार्य करवाने या आपत्तियों को नजरअंदाज करने जैसी बातें यदि सामने आती हैं तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की एक बड़ी कमजोरी मानी जाएगी। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए ताकि लोगों का भरोसा कायम रह सके और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिल सके।
कौन है Vimal Negi ?
Vimal Negi हिमाचल प्रदेश बिजली पारेषण निगम लिमिटेड में मुख्य अभियंता थे और ऊर्जा क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े हुए थे। मार्च 2025 में, उनके अचानक लापता होने और बाद में संदिग्ध परिस्थितियों में शव मिलने के बाद, यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया। इस घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली, अधिकारियों पर कथित दबाव और परियोजनाओं में पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े किए।
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