World Suicide Prevention Day : दस सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों के जीवन में आने वाले ऐसे पलों के दौरान उसे ऐसी मनोस्थिति से निकालना है। जींद की अजमेर बस्ती निवासी 30 वर्षीय चंद्रमोहन तांत्रिक क्रियाओं के डर से आत्म हत्या की स्थिति में आ गया था, लेकिन इसी दौरान उसकी बातचीत बजरंग दल के सदस्यों से हुई। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से साथ मिलने के बाद अब चंद्रमोहन की हालत ठीक है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!चंद्रमोहन के अनुसान करीब एक साल पहले उसके घर के पास ही बने चर्च के पादरी से उसका संपर्क हुआ। पादरी ने उसे ईसाई धर्म अपनाने को कहा, लेकिन चंद्रमोहन ने मना कर दिया। चंद्रमोहन बताते हैं कि इसके कारण पादरी ने उसे शैतानी ताकत का डर दिखाया। वहीं चर्च में हर समय लोगों में शौतानी तकाकतों को दिखाया जाता था।
इससे वह डरने लगा और धीरे-धीरे अवसाद में आ गया। रात रात भर नींद नहीं आती थी। इसके चलते उसका काम धंधा भी प्रभावित होने लगा। चंद्रमोहन के अनुसार उसके दिमाग में आत्महत्या जैसी बातें आने लगी थी। उसे हर समय शैतानी ताकतों का डर लगा रहता था। इसी बीच किसी ने उसे बरजंग दल के बारे में बताया। इन लोगों के संपर्क आने से के बाद उसका जीवन सामान्य होने लगा है।

युवाओं में यह स्थिति अधिक (World Suicide Prevention Day)
मनोवैज्ञानिक डा. नरेश जागलान के अनुसार यह स्थिति युवाओं में अधिक है। करियर, प्यार, आर्थिक स्थिति व पारिवारिक परिस्थितियां इसके मुख्य कारण हैं। यह हर किसी के जीवन में होता है। इससे भागने की बजाय इससे लड़ना चाहिए। चंद्रमोहन जैसे मामले में पुलिस व कानून की मदद ली जानी चाहिए। मरने का एक वही कारण होता है।
ऐसे में जीवन जीने के कारण तलाशने चाहिंए। अपमान, अकेलापन सहना सीखें। युवा करियर व प्यार को लेकर अधिक संवेदनशील होते हैं। उन्हें लगता है कि वे कुछ नहीं बने। सबसे जरूरी है अच्छा इंसान बनना। इसी प्रकार प्यार में ऐसा होता है। कुछ लोग सट्टे जैसी लत में लग कर आर्थिक नुकसान कर लेते हैं। इसके कारण भी आत्महत्या होती हैं। इसी कुरीतियों से बचना चाहिए।
जीवन अनमोल, आत्महत्या नहीं समाधान (World Suicide Prevention Day)
जानेमाने मनोवैज्ञानिक डा. नरेश जागलान के अनुसार इस प्रकार के विचार हर किसी व्यक्ति के मन में आते हैं। किसी-किसी के मन में यह विचार आते रहते हैं। यह क्षण भर की सोच होती है। यदि उसे किसी की मदद मिल जाए तो विचार टल जाता है। आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। इसके लिए हमेशा अपनी परेशानी अपने परिवार व दोस्तों के साथ सांझा करनी चाहिए। विशेषज्ञ मनोवैज्ञानिक से परामर्श जरूर लें।













