Angel One के जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के नतीजे सामने आने के बाद 17 अप्रैल को शेयरों में अच्छी तेजी देखी गई। बीएसई पर शेयर की कीमत पिछले बंद भाव से 9.6 प्रतिशत तक चढ़कर 320.50 रुपये के हाई तक पहुंच गई।

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Angel One के शानदार तिमाही नतीजे

तिमाही नतीजों के बाद ब्रोकरेज सिटी और इनवेस्टेक इस शेयर पर बुलिश बने हुए हैं। मार्च 2026 तिमाही के दौरान एंजेल वन का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 83.5 प्रतिशत बढ़कर 320.23 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 174.52 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1459.4 करोड़ रुपये रहा। मार्च 2025 तिमाही में यह 1057.8 करोड़ रुपये था।

खर्च में बढ़ोतरी और फंड जुटाने की रणनीति

मार्च 2026 तिमाही के दौरान कंपनी के खर्च बढ़कर 1027.33 करोड़ रुपये के रहे। एक साल पहले खर्च 822.11 करोड़ रुपये के थे। तिमाही के दौरान एंजेल वन ने प्राइवेट प्लेसमेंट बेसिस पर नॉन कनवर्टिबल डिबेंचर जारी करके 50 करोड़ रुपये जुटाए।

मार्केट कैप, हिस्सेदारी और शेयर का प्रदर्शन

कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 28600 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। कंपनी में दिसंबर 2025 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 28.87 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर एक महीने में 45 प्रतिशत और 2 सप्ताह में 30 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है। 3 साल में कीमत लगभग 150 प्रतिशत मजबूत हुई है।

ब्रोकरेज हाउस की रेटिंग और टारगेट प्राइस ( Angel One )

ब्रोकरेज सिटी ने एंजेल वन के शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है और 340 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस कंपनी के मामले में मार्च तिमाही में क्लाइंट की ट्रेडिंग एक्टिविटी में मजबूती दिखी। सभी कैटेगरी के ऑर्डर्स पर एवरेज रियलाइजेशन में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है। इनवेस्टेक ने भी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 340 रुपये का टारगेट रखा है। ब्रोकरेज ने कहा कि बेहतर ब्रोकिंग रियलाइजेशन और शुद्ध ब्याज आय की बदौलत मुनाफा अनुमान से ज्यादा रहा है। डिजिटल बिजनेस मॉडल से ऑपरेशन लीवरेज मिल रहा है। शेयर की वैल्युएशन तर्कसंगत है।

Angel One का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा वित्त वर्ष 2026 में घटकर 915 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 1172 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5136.6 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो वित्त वर्ष 2025 में 5238.37 करोड़ रुपये था। खर्च बढ़कर 3880.35 करोड़ रुपये के रहे, जो एक साल पहले 3655.72 करोड़ रुपये के थे।