दूसरा लोन मिलेगा या नहीं? FOIR बताएगा जवाब, बैंक का लोन देने का फैसला सिर्फ आपकी सैलरी पर निर्भर नहीं करता है बैंक यह देखता है कि आपकी इनकम का कितना भाग पहले वाले लोन की ईएमआई भरने में जा रहा है। इस गणना को फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो (FOIR) फॉयर कहा जाता है। यदि आप इसको समझ लेते है तो आपको पता चल जायेगा की आपको लोन मिल सकता या नहीं मिल सकता।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!आजकल घर खरीदने, कार खरीदने, बिजनेस शुरू करने के लिए लोन लेना बहुत ज्यादा आम हो गया है। लेकिन समस्याजब आती है जब आपने पहले से ही लोन ले रखा ही और वो लोन अभी भी चल रहा हो और साथ में ही आपको दूसरे लोन की जरूरत पड़ जाती है इस समय लोग सोचते है कि पहले लोन चल रहा है क्या बैंक हमें दूसरा लोन दे देगा।
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बड़ी बातें
क्या होता है FOIR?
FOIR क्या है इसका क्या मतलब होता है इसको फिक्स्ड ओब्लिगेशन टू इनकम रेशियो कहा जाता है। यह हमे बताता है कि आपकी आय का कितना हिस्सा पहले से लिए लोन की ईएमआई भरने में जा रहा है। जैसे, होम लोन ईएमआई, कार लोन ईएमआई, पर्सनल लोन ईएमआई, बैंक इसी आंकड़े को देखता है और फिर तय करता है की आपको लोन देना है या नहीं।
FOIR निकालने कि ट्रिक्स
फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो निकालने का सबसे आसान तरीका यह है कि इसके लिए आपको बस एक छोटा सा गणना करना होगा,

FOIR = आपकी कुल मासिक ईएमआई को मासिक आय से विभाजित करना होगा और फिर उसको 100 से गुणा करना।
उदाहरण के लिए जैसे आपकी मासिक सैलरी 60,000 रुपये है और आप पहले से ही उस सैलरी में से 20,000 रुपये ईएमआई भर रहे हो तो,
20,000 ÷ 60,000 × 100 = 33.33%
इस स्थिति में, आपका FOIR लगभग 33 प्रतिशत होगा। यह आंकड़ा बैंकों के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इससे आपकी लोन को भरने की क्षमता का अनुमान लगाया जा सकता है।
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बैंक कितना FOIR को बेस्ट मानता?
ज्यादातर यह बैंक चाहते हैं कि किसी भी व्यक्ति का कुल FOIR 40% से 50% के बीच रहे।
मान लीजिए आपकी सैलरी 80,000 रुपये है, बैंक अधिकतम 40,000 रुपये तक की कुल इक्विटेड मंथली इंस्टॉलमेंट (EMI) को सुरक्षित मान सकते हैं। यदि आपकी मौजूदा EMI 25,000 रुपये है, तो नई EMI लगभग 15,000 रुपये तक स्वीकार की जा सकती है।
हालांकि अलग अलग बैंकों की नीतियां अलग हो सकती हैं। कुछ बैंक उच्च आय वाले ग्राहकों को थोड़ा अधिक फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो की अनुमति भी देते हैं।
FOIR ज्यादा होने से क्या होगा?
यदि आपका FOIR बैंक की तय की हुई सीमा से ऊपर चला जाता है, तो नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है। बैंक को लगता है कि आपकी आय का बड़ा हिस्सा पहले ही लोन भरने में खर्च हो रहा है, भविष्य में लोन भरने का जोखिम बढ़ सकता है, अतिरिक्त EMI आपके वित्तीय संतुलन को बिगाड़ सकती है।
ऐसी स्थिति में बैंक लोन के आवेदन को स्वीकार नहीं हैं लेकिन छोटा लोन देने का ऑफर दे सकते हैं, ज्यादा ब्याज दर लगा सकते हैं।
क्या NBFC से मिल सकता है लोन?
अगर बैंक आपका आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं, तो नॉन बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियां एक ऑप्शन हो सकती हैं,कई एनबीएफसी संस्थाएं 60% से 65% तक फixed obligation to income ratio होने पर भी लोन देने पर विचार करती हैं। इसका मतलब है कि यदि आपकी आय का बड़ा हिस्सा पहले से ईएमआई में जा रहा है, तब भी आपको वित्तीय सहायता मिल सकती है। लेकिन ब्याज दर बैंक की तुलना से ज्यादा होती है Process फीस ज्यादा होती है, कुल लोन लागत भी बढ़ सकती है।
दूसरा लोन लेने से पहले क्या करना चाहिए?
पहले किसी छोटे लोन को चुकाने की कोशिश करें अगर संभव है। इससे आपका FOIR कम होगा और नया लोन मिलने की संभावना ओर बढ़ जाएगी।
क्रेडिट कार्ड का बकाया भी आपकी देनदारी में शामिल होता है। इसे कम करने से आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो सकती है।
अगर आपकी कोई अतिरिक्त आय का ऑप्शन है, जैसे कि किराया, फ्रीलांस काम, या पार्ट टाइम नौकरी, तो उसके सारे सबूत तैयार रखें। इससे बैंक आपकी भुगतान क्षमता को बेहतर समझ सकते हैं।
FAQ
- FOIR का पूरा अर्थ क्या है?
FOIR का पूरा अर्थ फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो है। यह बताता है कि आपकी मासिक आय का कितना भाग ईएमआई के लिए जा रहा है।
- क्या एक लोन चलने के साथ साथ दूसरा लोन ले सकते है?
हाँ, यह संभव है। लेकिन बैंक आपकी आय, मौजूदा ईएमआई, क्रेडिट स्कोर और फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो को देखकर आखरी निर्णय लेते हैं।
- बैंक के लिए आदर्श फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो कितना माना जाता है?
अधिकांश बैंक 40% से 50% तक के फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो को सुरक्षित मानते हैं।
- क्या 60% फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो होने पर लोन प्राप्त किया जा सकता है?
कुछ मामलों में, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां 60% से 65% तक के फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो पर भी लोन प्रदान कर सकती हैं।
Source: https://hindi.economictimes.com/













