Haryana : हरियाणा में रेलवे लाइन केस में किसानों को कोर्ट से बड़ी राहत, 2 करोड़ रुपए प्रति एकड़ मिलेगा मुआवजा

On: September 27, 2025 6:42 AM
Rohtak Maham Hansi Railway Line Case Farmer Court Relief Rs 2 Crore Compensation

Haryana Rohtak Maham Hansi Railway Line Case : हरियाणा में रेलवे लाइन जमीन एक्वायर केस में किसानों को बड़ी राहत मिली है। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने आदेश दिए है कि किसानों को प्रति एकड़ 2 करोड़ रुपए मुआवजा दिया जाए। पहले यह मुआवजा 78.40 लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से दिया जाना था लेकिन किसानों ने कोर्ट में केस किया और अब कोर्ट के आदेशों से किसानों को राहत मिली है।

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न्यायामूर्ति ने स्पष्ट किया कि सरकार और निचली अदालतें वास्तविक बिक्री उदाहरणों को नजरअंदाज कर किसानों को उनके हक के उचित मुआवजे से वंचित नहीं कर सकती। रोहतक-महम-हांसी रेलवे लाइन प्रोजक्ट को लेकर किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसमें किसानों को मुआवजा राशि कम मिल रही थी और किसान इस मुआवजा राशि से संतुष्ट नहीं थे। इस रेलवे लाइन पर आने वाले रोहतक के गांव भाली आनंदपुर के किसानों द्वारा कोर्ट में केस डाल दिया था।

Rohtak Maham Hansi Railway Line Case : हजारों किसानों के लिए महत्वपूर्ण फैसला

अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana Highcourt) के न्यायमूर्ति हरकेश मनुजा ने दिए आदेश में कहा कि किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा 78.40 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मिलेगा, साथ ही उन्हें 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलने वाले अन्य सभी वैधानिक लाभ और ब्याज भी दिया जाएगा। इस हिसाब से किसानों को 2 करोड़ रुपए के करीब प्रति एकड़ मुआवजा राशि मिलने जा रही है। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का यह फैसला उन किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण हो गया है, जिनकी जमीनें सरकारी या दूसरी सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहण की जाती हैं।

Rohtak Maham Hansi Railway Line Case : 2013-14 में हुआ था जमीन अधिग्रहण

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील DK टूटेजा के अनुसार रोहतक-महम-हांसी नई रेलवे लाइन परियोजना के लिए साल 2013-14 में गांव भाली आनंदपुर की 140 कनाल 19 मरला जमीन का अधिग्रहण किया गया था। भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने 1 जून 2016 को अवॉर्ड जारी करते हुए मुआवजा दर मात्र 20 लाख रुपये प्रति एकड़ तय की थी। इससे असंतुष्ट किसानों ने धारा 64, भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 के तहत रेफरेंस कोर्ट में अपील की। अब इस केस पर फैसला सुनाया गया है।


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